Likhta hu tere bare dekh ke raaton ko sitare

 लिखता हु तेरे बारे देख के रातों को सितारे 

इश्क़ है हाँ तुझसे जाने ये मौसम सारे 

खुलके हाँ में कहना चाहता दिल के भेद सारे 

तू होवे या ना होवे मेरी जाने मुझ को दुनिया मे सारे तेरे ही नाम सहारे 


सोचा ना था ये हो वेगा इश्क़ मुझको तुझसे होयेगा।

दुनिया मेरी पूरी पलट गई देख के तेरे नेनो के इशारे 

लिखता हूं अब तेरे बारे देखके रातों को सितारें


गलतियां तेरी दिखती नही है तेरे तो कोई अच्छी नही तेरे इलावा मेनू कोई जचती नही है 

मंगता था मैं तो रब से  मुझको मिले कोई हट के 

रब ता मेरी सुन ही लिया मेरे लिए तेनु चुन  ही लिया।


लिखता था जो इश्क़ की बाते उससे होगी मेरी ऐसी मुलाकातें 

रब ने हाँ सब सुन ही लिया उसने तुझको मेरे लिए चुन ही लिया।


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